प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में मैथिलीशरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) की कविता पढ़ा

राज्यसभा (Rajya Sabha) की कार्यवाही शुरू होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देते हुए कहा कि भारत के लिए दुनिया ने बहुत आशंकाएं जताई थीं। विश्व बहुत चिंतित था कि अगर कोरोना (Corona) की इस महामारी में भारत अपने आप को संभाल नहीं पाया तो न सिर्फ भारत बल्कि पूरी मानव जाति के लिए इतना बड़ा संकट आ जाएगा।

आजादी के 75वें साल

हम आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, ये एक प्रेरक अवसर है। हम जहां हों, मां भारती की संतान के रूप में आजादी के 75वें पर्व को हमें प्रेरणा का पर्व मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छा होता कि राष्ट्रपति जी का भाषण सुनने के लिए सब होते तो लोकतंत्र की गरिमा और बढ़ जाती। लेकिन राष्ट्रपति जी के भाषण की ताकत इतनी थी कि न सुनने के बाद भी बात पहुंच गई।

सोशल मीडिया (Social Media) पर देखा होगा फुटपाथ पर छोटी झोपड़ी लगाकर बैठी एक बुढ़ी मां अपनी झोपड़ी के बाहर दीया जलाकर भारत के शुभ के लिए कामना कर रही है। हम उसका मजाक उड़ा रहे हैं, उस भावना का मखौल उड़ा रहे हैं! विरोध करने के लिए कितने मुद्दे हैं। यहां लोकतंत्र को लेकर काफी उपदेश दिए गए हैं। मैं नहीं मानता कि जो बातें बताई गई हैं देश का कोई भी नागरिक उन पर भरोसा करेगा। भारत का लोकतंत्र ऐसा नहीं है जिसकी खाल हम इस तरह से उधेड़ सकते हैं, ऐसी गलती हम न करें।

भारत में 81 गणतंत्रों का वर्णन

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारा लोकतंत्र किसी भी मायने में वेस्टर्न इंस्टीट्यूशन (Western Institution) नहीं है। ये एक ह्यूमन इंस्टीट्यूशन (Human institute) है। भारत का इतिहास लोकतांत्रिक संस्थानों के उदाहरणों से भरा पड़ा है। प्राचीन भारत में 81 गणतंत्रों का वर्णन मिलता है।

कोरोना काल में दुनिया में लोग निवेश के लिए तरस रहे हैं लेकिन भारत में रिकॉर्ड निवेश हो रहा है। Fact बता रहे हैं कि अनेक देशों की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है जबकि दुनिया भारत में डबल डिजिट ग्रोथ का अनुमान लगा रही है।

मैथिलीशरण गुप्त की कविता

PM मोदी ने राज्यसभा में मैथिलीशरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) की कविता पढ़ते हुए बोला कि अवसर तेरे लिए खड़ा है, फिर भी तू चुपचाप पड़ा है। तेरा कर्मक्षेत्र बड़ा है, पल पल है अनमोल, अरे भारत उठ, आंखें खोल। फिर उन्होंने इल कविता कि लाइन आगे बढ़ाते हुए बोले आज के समय में अगर कहा जाता तो ऐसे कहते, अवसर तेरे लिए खड़ा है, तू आत्मविश्वास से भरा पड़ा है, हर बाधा हर बंदिश को तोड़, अरे भारत आत्मनिर्भरता के पथ पर दौड़।

यहां पढ़ें पूरी ‘चेतना’

अरे भारत! उठ, आंखें खोल,
उड़कर यंत्रों से, खगोल में घूम रहा भूगोल!

अवसर तेरे लिए खड़ा है,
फिर भी तू चुपचाप पड़ा है।
तेरा कर्मक्षेत्र बड़ा है,
पल पल है अनमोल।
अरे भारत! उठ, आँखें खोल॥

बहुत हुआ अब क्या होना है,
रहा सहा भी क्या खोना है?
तेरी मिट्टी में सोना है,
तू अपने को तोल।
अरे भारत! उठ, आँखें खोल॥

दिखला कर भी अपनी माया,
अब तक जो न जगत ने पाया;
देकर वही भाव मन भाया,
जीवन की जय बोल।
अरे भारत! उठ, आँखें खोल॥

तेरी ऐसी वसुन्धरा है-
जिस पर स्वयं स्वर्ग उतरा है।
अब भी भावुक भाव भरा है,
उठे कर्म-कल्लोल।
अरे भारत! उठ, आँखें खोल॥